कहाँ हैं मज़िल अपनी?
किस राह पर जाना हैं?
नहीं जानते हम।
कुछ भी तो तय नहीं है।
सफ़र भी अनजाने
पड़ाव भी अनिश्चित
पग भी गिने चुने।
हे परमात्मा !
पत्ता भी नहीं हिलता
तेरी रज़ा के बगैर।
तेरी माया तू ही जाने।
जीवन एक यात्रा है
हम सब पथिक।
तू ही मार्गदर्शक !
तू ही रखवाला!
हम हैं महज़ कठपुतलियां।
नित्य नये अनुभव ।
कैसे निर्धारित करता है समय?
तेरी लीला न्यारी प्रभु !
रिपुदमन शर्मा

