CHANDIGARH(RANJANDEEP SANDHU, AMRIK MATHAROO):- अकालीदल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की ओर से किसान विधेयक के खिलाफ रोष मार्च निकाला। लेकिन यह प्रदर्शन आम जनता के लिए मुसीबत बन गया। मुल्लांपुर और जीरकुपर से लेकर डेराबस्सी तक लंबा जाम लग गया। इससे हजारों लोग परेशान हुए। जो वैकल्पिक रास्ते थे, वहां भी जाम लग गया। पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर को चंडीगढ़ आकर राजभवन में ज्ञापन देने के लिए मार्च निकाला गया। ट्रैक्टर तथा गाड़ियों के काफिले का यह मार्च वीरवार रात 9 बजकर 20 मिनट पर चंडीगढ़ की सीमा पर स्थित मुल्लांपुर पहंचा। यहां पर चंडीगढ़ पुलिस द्वारा सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। सुखबीर बादल एक कैंटर पर बने मंच पर खड़े होकर आए और उन्होंने कुछ देर संबोधन किया।

इसी दौरान उनके साथ आए अकाली वर्कर उग्र होने लगे। भाषण के बाद सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया, बीबी जगीर कौर, प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा, मंजिदर सिंह सिरसा, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, गुलजार सिंह रणीके, हरजीत इंद्र सिंह ग्रेवाल धरने पर बैठ गए और वर्करों को भी बैठने के लिए कहा।
मुल्लांपुर से सुखबीर, जीरकपुर बार्डर से हरसिमरत समेत प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बलविंदर भूंदड़, एनके शर्मा, बिक्रम मजीठिया, बीबी जगीर कौर, डॉ दलजीत सिंह चीमा को हिरासत में लिया गया। देर रात 12 बजे सभी को रिहा कर दिया। सुखबीर ने कहा कि केंद्र की शह पर लाठीचार्ज करना गलत है। मजीठिया ने कहा वह कृषि कानूनों को लेकर राष्ट्रपति के नाम चंडीगढ़ में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे।

