हाथरस मामला पुलिस का रेप से इनकार ,इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिया स्वत संज्ञान

इलाहाबाद (RANJANDEEP SANDHU, AMRIK MATHAROO):- इससे पहले उत्तर प्रदेश के लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा था कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट में ये साफ़ कहा गया है कि महिला के साथ रेप नहीं हुआ. उनके अनुसार मौत का कारण गर्दन में आई गंभीर चोटें हैं. उन्होंने कहा, ‘दिल्ली की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की की मृत्यु का कारण गले में चोट होने के कारण जो ट्रॉमा हुआ उससे बताई गयी है. फ़ोरेंसिक लैब की रिपोर्ट भी आ गई है, जिसमें ये स्पष्ट तौर पर बताया गया है कि जो सैंपल इक्कट्ठे किए गए उसमें शुक्राणु/स्पर्म नहीं पाया गया है. इससे स्पष्ट होता है कि ग़लत तरीक़े से जातीय तनाव पैदा करने के लिए इस तरह की चीज़ें कराई गईं. पुलिस ने शुरू से इस मामले में त्वरित कार्रवाई की है

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसका जवाब देते हुए कहा है, लॉ एंड ऑर्डर ने निहायत ही घिनौनी बात कही है. वो कहते हैं रेप नहीं हुआ क्योंकि सिमन नहीं मिला. थोड़ा सा क़ानून बता दूं. धारा 375 का 2013 में संशोधन किया गया. सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश बनाम बाबूनाथ 1994 केस में साफ़ तौर से कहा है कि सिमन का ना मिलना या लिंग का पेनेट्रेशन ना होना ही रेप नहीं है, उसकी कोशिश करना भी रेप है.

वहीं दूसरी ओर दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 19 वर्ष की महिला को 28 सितंबर को सफ़दरजंग अस्पताल में लाया गया और उनकी हालत काफ़ी गंभीर थी. जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह सर्वाइकल स्पाइन इंजरी, ट्रॉमा से लकवा मारना और गंभीर संक्रमण से पीड़ित थीं

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