विधायक शैरी कलसी के प्रयासों स्वरूप बटाला शहर में निर्मित किया जा रहा है शानदार विरासती दरवाजा
बटाला शहर की ऐतिहासिक और विरासती शान की झलक पेश करेगा यह दरवाजा – शैरी कलसी।
बटाला/गुरदासपुर, 04 मार्च (अमरीक मठारू ) – कभी 12 दरवाजों का अतिस्तत्व रखने वाले ऐतिहासिक शहर बटाला में अब एक और नया और शानदार दरवाजा (गेट) बटाला शहर की शान में इजाफा करने जा रहा है। बटाला के विधायक और आम आदमी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी प्रधान स. अमन शेर सिंह शैरी कलसी के प्रयासों से ऐतिहासिक और विरासती शहर बटाला के जालंधर रोड पर इस नए दरवाजे (गेट) का निर्माण तेजी से जारी है। यह दरवाजा बटाला शहर की सीमा में प्रवेश करने वाले राहगीरों का स्वागत करेगा और साथ ही यह बटाला शहर की ऐतिहासिक और विरासती शान की झलक भी देगा।
इस संबंध में जानकारी देते हुए विधायक स. अमन शेर सिंह शैरी कलसी ने बताया कि बटाला शहर अपने बुनियादी समय से ही बहुत ऐतिहासिक और विरासती शहर रहा है और पंजाब के इतिहास में बटाला का हमेशा ही प्रमुख स्थान रहा है। उन्होंने बताया कि साहिब श्री गुरु नानक देव जी का बटाला में माता सुलखनी जी से विवाह, पावन श्री काली द्वारा मंदिर, श्री अचलेश्वर धाम के अलावा अन्य धर्मों के धार्मिक स्थल इस शहर में स्थित हैं। उन्होंने बताया कि बटाला शहर विभिन्न हकूमतों के दौर का साक्ष्य होने के साथ-साथ बाबा बंदा सिंह बहादुर, मिसल दौर में रामगढ़िया मिसल, कन्हैया मिसल और फिर महाराजा रणजीत सिंह के शानदार शासन का भी गवाह रहा है।
विधायक स. शैरी कलसी ने आगे बताया कि बटाला के जालंधर रोड पर बन रहा नया स्वागती दरवाजा (गेट) बटाला शहर की ऐतिहासिक विरासत को रूपमान करेगा। उन्होंने बताया कि इस स्वागती गेट को नानकशाही ईंटों से पुरातन छवि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस गेट (दरवाजे) का निर्माण तेजी से जारी है और इस साल इसे पूरा कर लिया जाएगा। विधायक स. शैरी कलसी ने कहा कि यह गेट (दरवाजा) सिर्फ गेट (दरवाजा) नहीं होगा बल्कि बटाला शहर की खूबसूरती, शान और पहचान का एक नया आइकन उभरकर सामने आएगा।
विधायक शैरी कलसी ने बताया कि जब राम देओ भट्टी द्वारा सन 1465 में बटाला शहर बसाया गया था, तो उसके बाद बटाला शहर की सुरक्षा के लिए 12 दरवाजे बनाए गए थे। उन्होंने बताया कि बटाला शहर के इन 12 दरवाजों के नाम खजूरी दरवाजा, पुरीयाँ मोरी दरवाजा, पहाड़ी दरवाजा, कपूरी दरवाजा, मियां दरवाजा (इसको नसीर-उल-हक दरवाजा भी कहा जाता था), अच्चली दरवाजा, हाथी या फीली दरवाजा (हाथी को फारसी में फीली कहते हैं), काजी मोरी दरवाजा, ठठियारी दरवाजा, भंडारी दरवाजा, ओहरी दरवाजा और तेली दरवाजा (जिसे अब शेरांवाला दरवाजा और नेहरू दरवाजा भी कहा जाता है) प्रसिद्ध थे। उन्होंने कहा कि समय के साथ इन दरवाजों में से कई समाप्त हो चुके हैं और अब सिर्फ तेली दरवाजा (अब नाम नेहरू गेट), खजूरी दरवाजा, कपूरी दरवाजा, अच्चली दरवाजा और भंडारी दरवाजा ही बाकी बचे हैं।
विधायक स. अमन शेर सिंह कलसी ने कहा कि वे पंजाब सरकार के पर्यटन और सांस्कृतिक मामले विभाग तक पहुंचकर बटाला शहर के पुरातन दरवाजों के संरक्षण के लिए विशेष प्रोजेक्ट लाएंगे ताकि पुराने दरवाजों के रूप में बटाला के ये ऐतिहासिक पन्ने हमेशा कायम रहें।
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